Film: the village ( द विलेज )
दर्शकों को हंसाने जितना ही मुश्किल डराना है. बेहतर कॉन्सेप्ट के साथ लोगों को बांधे रखना और हर सीन के साथ डर पैदा करना आसान नहीं है. हॉरर के तड़के के साथ अमेजन प्राइम वीडियो पर वेब सीरीज ‘द विलेज’ इस हफ्ते रिलीज हुई है. इसके जरिए तमिल एक्टर आर्या ने ओटीटी की दुनिया में कदम रखा है. 6 एपिसोड वाली यह सीरीज एक नया कॉन्सेप्ट थ्रिल के साथ दर्शकों के सामने परोसती है।
तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले में स्थित कट्टियल अभिशप्त गांव है। इस निर्जन और वीरान गांव में जो भी जाता है वापस नहीं लौटता। इसलिए आसपास के गांव के निवासियों ने वहां जाना बंद कर दिया है। डॉ. गौतम (आर्य) अपनी पत्नी नेहा (दिव्या पिल्लई), बेटी माया (बेबी आजिया) और बीगल डॉग हेक्टिक के साथ रोड ट्रिप के लिए निकला है।
थूथुकुडी के नजदीक नेशनल हाइवे 38 पर एक दुर्घटना होने की वजह से लम्बा जाम लगा है। रात घिर चुकी है। इसलिए पत्नी की सलाह पर जीपीएस के जरिए वो वैकल्पिक रास्ता लेते हैं, जो कट्टियल गांव से होकर जाता है। गांव की सरहद पर पहुंचते ही रास्ते में कीलें बिखरी होने की वजह उनकी कार के अगले पहियों में पंक्चर हो जाता है। परिवार को कार के अंदर छोड़कर गौतम मदद ढूंढने निकलता है।
वो पास के गांव नवमलई पहुंचता है, जहां बार में मौजूद लोगों से मदद की गुहार लगाता है। स्थानीय निवासी शक्तिवेल (अब्दुकलम नरेन), करुणागम (मुत्थुकुमार) और बार के मालिक पीटर (जॉर्ज मार्यन) के चेहरों की गांव का नाम सुनते ही हवाइयां उड़ जाती हैं। तीनों उसे रातभर रुककर सुबह चलने के लिए कहते हैं।
गौतम परिवार का हवाला देकर उन्हें मनाने की कोशिश करता है, मगर उनकी बेरुखी देख अकेला लौट जाता है। लौटने पर पाता है कि उसका परिवार और कार दोनों वहां से गायब हैं। गौतम बदहवास सा उन्हें ढूंढने के लिए इधर-उधर भागता रहता है। भारी बारिश और अंधेरे की वजह से गौतम रास्ता भटक जाता है और ठोकर खाकर गिर पड़ता है, जिससे कुछ देर के लिए चेतना खो बैठता है।
होश में आने पर देखता है कि शक्ति, करुणागम और पीटर ट्रैक्टर और हथियारों के साथ उसकी मदद के लिए आ चुके हैं। इसके बाद की कहानी नेहा और माया की खोज में आगे बढ़ती है और इसके साथ कुछ ऐसे राज खुलते हैं, जो किसी की भी रूह कंपाने के लिए काफी है। इन राज का कनेक्शन शक्ति और करुणागम (करू) की पिछली जिंदगी से भी है, जो आगे चलकर खुलता है।
कैसा है अभिनय और प्रोडक्शन डिजाइन?
ऐसी सीरीज या फिल्मों में प्रोडक्शन डिजाइन और मेकअप टीम की भूमिका काफी अहम हो जाती है। दरिंदों को शारीरिक रूप से डिफॉर्म दिखाया गया है। उनके शरीर पर मोटे-मोट छाले जैसे हैं। आंखें और हाथ-पांव असामान्य हैं। हालांकि, मेकअप का बनावटीपन कहीं-कहीं जाहिर हो जाता है। जंगल में चमकने वाले पौधों के कुछ दृश्य भी बनावटी लगते हैं।
कहानी का मुख्य हिस्सा रात में ही घटता है, इसलिए सीरीज के ज्यादातर हिस्से की कलर टोन ब्लू रखी गयी है। इससे हिंसात्मक और खूनखराबे वाले दृश्यों की इंटेसिटी घट गयी है, जो दर्शकों के लिए अच्छा ही है।
दृश्यों में इमोशंस सही जगह पर आती हैं, मगर इन्हें जाहिर करने का ढंग कहीं-कहीं काफी लाउड लगता है। कुछ दृश्यों में कलाकारों की प्रतिक्रियाएं शिथिल महसूस होती। दक्षिण भाषाओं में आने वाली सीरीजों के साथ एक मुश्किल यह भी है कि हिंदी डबिंग संवादों की गंभीरता को कम कर देती है।
वाक्यों के अंत में स्वीकारोक्ति की ध्वनि को भी इस तरह डब किया जाता है कि बहुत नाटकीय लगता है। वहीं, डबिंग आर्टिस्ट जिस तरह से संवाद डब करते हैं, वो कई बार कलाकारों के अभिनय की लय से तालमेल नहीं खाता। द विलेज दिलचस्प कॉन्सेप्ट वाली वेब सीरीज है, जिसे तकनीकी तौर पर और बेहतर किया जा सकता था।
Join telegram:Click here
Direct download link:Click here
Download full HD 1080p:Click here
Watch online 480p:Click here
Watch online 720p:Click here

.jpeg)
.jpeg)
.png)
0 Comments