Movie Review
कैप्टन अमेरिका-ब्रेव न्यू वर्ल्ड
कलाकार. एंथनी मैकी , डैनी रामीरेज , शिरा हास , कार्ल लम्बली , लिव टेलर , हर्ष नायर और हैरीसन फोर्ड
लेखक. रॉब एडवर्ड्स , मैलकम स्पेलमैन , डालन मुसोन , जूलियस ओनाह और पीटर ग्लांज
निर्देशक. जूलियस ओनाह
निर्माता. केविन फाइगी और नेट मूर
रिलीज. 14 फरवरी 2025
मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स के दर्शक बीते 25 साल में बड़े हुए वे युवा हैं जिनको हिंदी सिनेमा से ज्यादा पश्चिमी सिनेमा में रुचि है। वे हॉलीवुड फिल्में उनकी बेहतरी और उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता के अलावा इन फिल्मों के बोल्ड सियासी रुख के चलते भी देखते हैं। वहां राष्ट्रपति भवन को धमाके में उड़ाया जाते दिखाना आम बात है। वहां के राष्ट्रपति पर जानलेवा हमला भी फिल्मों में खूब दिखाया जा चुका है। लेकिन, इस बार फिल्म ‘कैप्टन अमेरिका-ब्रेव न्यू वर्ल्ड’ में एक नई बात हुई है। इस फिल्म में भारतीय प्रधानमंत्री को विश्व के शक्तिशाली लीडर के रूप में दिखाया गया है। वैश्विक संकट में अमेरिका के राष्ट्रपति को भारतीय प्रधानमंत्री से सलाह लेते दिखाया गया है और उनकी डांट भी खाते दिखाया गया है। ये ही नया इंडिया है।Read more
दो घंटे की बढ़िया पॉलिटिकल थ्रिलर
बदलते भारत की बुलंद तस्वीर दिखाती फिल्म है, ‘कैप्टन अमेरिका-ब्रेव न्यू वर्ल्ड’। कहानी एमसीयू के अगले अध्याय से ज्यादा एक राजनीतिक रोमांच फिल्म जैसी है। थैसियस रॉस अमेरिका का राष्ट्रपति बन चुका है। वह नए कैप्टन अमेरिका यानी सैम विल्सन के साथ मिलकर काम करना चाहता है। हिंद महासागर में धरती की कोख से उभरे एक द्वीप पर वकांडा की वाइब्रैनियम से भी ज्यादा शक्तिशाली धातु निकली है। जापान इस पर अपना कब्जा जमाना चाहता है, लेकिन अमेरिका चाहता है कि इसमें पूरी दुनिया की हिस्सेदारी हो। अंतर्राष्ट्रीय सियासत दिखाती अमेरिकी फिल्मों में अब तक जो काम रूस के हवाले होता था, इस बार उस पाले में जापान है। भारत अब ऐसा देश है जिसका समर्थन अमेरिका चाहता है। बदले वैश्विक समीकरणों को पहली बार दमदार तरीके से दिखाती फिल्म ‘कैप्टन अमेरिका-ब्रेव न्यू वर्ल्ड’ को एमसीयू की 35वीं फिल्म के तौर पर न भी देखें तो भी कोई खास फर्क नहीं पड़ता, हां फिल्म के एंड क्रेडिट रोल्स में कहानी का अगला सिक्सर जड़ा गया है और वहीं से ये फिल्म मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स की नई दुनिया बसाने की कोशिश करने वाली पहली फिल्म बन जाती है।Read more
मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स के दर्शक बीते 25 साल में बड़े हुए वे युवा हैं जिनको हिंदी सिनेमा से ज्यादा पश्चिमी सिनेमा में रुचि है। वे हॉलीवुड फिल्में उनकी बेहतरी और उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता के अलावा इन फिल्मों के बोल्ड सियासी रुख के चलते भी देखते हैं। वहां राष्ट्रपति भवन को धमाके में उड़ाया जाते दिखाना आम बात है। वहां के राष्ट्रपति पर जानलेवा हमला भी फिल्मों में खूब दिखाया जा चुका है। लेकिन, इस बार फिल्म ‘कैप्टन अमेरिका-ब्रेव न्यू वर्ल्ड’ में एक नई बात हुई है। इस फिल्म में भारतीय प्रधानमंत्री को विश्व के शक्तिशाली लीडर के रूप में दिखाया गया है। वैश्विक संकट में अमेरिका के राष्ट्रपति को भारतीय प्रधानमंत्री से सलाह लेते दिखाया गया है और उनकी डांट भी खाते दिखाया गया है। ये ही नया इंडिया है।
कैप्टन अमेरिका: ब्रेव न्यू वर्ल्ड - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
दो घंटे की बढ़िया पॉलिटिकल थ्रिलर
बदलते भारत की बुलंद तस्वीर दिखाती फिल्म है, ‘कैप्टन अमेरिका-ब्रेव न्यू वर्ल्ड’। कहानी एमसीयू के अगले अध्याय से ज्यादा एक राजनीतिक रोमांच फिल्म जैसी है। थैसियस रॉस अमेरिका का राष्ट्रपति बन चुका है। वह नए कैप्टन अमेरिका यानी सैम विल्सन के साथ मिलकर काम करना चाहता है। हिंद महासागर में धरती की कोख से उभरे एक द्वीप पर वकांडा की वाइब्रैनियम से भी ज्यादा शक्तिशाली धातु निकली है। जापान इस पर अपना कब्जा जमाना चाहता है, लेकिन अमेरिका चाहता है कि इसमें पूरी दुनिया की हिस्सेदारी हो। अंतर्राष्ट्रीय सियासत दिखाती अमेरिकी फिल्मों में अब तक जो काम रूस के हवाले होता था, इस बार उस पाले में जापान है। भारत अब ऐसा देश है जिसका समर्थन अमेरिका चाहता है। बदले वैश्विक समीकरणों को पहली बार दमदार तरीके से दिखाती फिल्म ‘कैप्टन अमेरिका-ब्रेव न्यू वर्ल्ड’ को एमसीयू की 35वीं फिल्म के तौर पर न भी देखें तो भी कोई खास फर्क नहीं पड़ता, हां फिल्म के एंड क्रेडिट रोल्स में कहानी का अगला सिक्सर जड़ा गया है और वहीं से ये फिल्म मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स की नई दुनिया बसाने की कोशिश करने वाली पहली फिल्म बन जाती है।Read more
कैप्टन अमेरिका: ब्रेव न्यू वर्ल्ड - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
नए एवेंजर्स की शुरू हो गई तलाश
ये तो अब सर्वविदित है ही कि मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स की ‘एवेंजर्स एंडगेम’ के बाद की दुनिया काफी बिखरी बिखरी सी रही है। मार्वल स्टूडियोज ने उसके बाद तमाम कोशिशें की कि लोग आयरमैन को भूल जाएं। हल्क को याद न करें। कैप्टन अमेरिका के रूप में स्टीव रोजर्स के रिटायरमेंट पर इमोशनल न हों, लेकिन ये हो न सका। दर्शकों ने इस दुनिया में इतना बड़ा भावनात्मक निवेश कर रखा है कि उनको फिर से इस दुनिया की तरफ खींचकर लाने के लिए नए कैप्टन अमेरिका को अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ नए एवेंजर्स तलाशने के मिशन के लिए हां करते हुए फिल्म ‘कैप्टन अमेरिका-ब्रेव न्यू वर्ल्ड’ में दिखाना ही पड़ा। ये फिल्म ज्यादा इमोशन पर न खेलते हुए, एक्शन और ड्रामा पर खेलती है। राष्ट्रपति को मारने की साजिश रचने वालों का पर्दाफाश करते करते कहानी उन सनातनी पौराणिक कथाओं की तरफ निकल जाती है जिसमें भस्मासुर जैसे दानव की कल्पना की गई है जो मोहिनी के मोह में अपने सिर पर हाथ रखकर खुद ही भस्म होता है।Read more
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