Chhaava full movie download छावा फुल मूवी डाउनलोड

छाबा मूवी रिव्यू




छावा मूवी रिव्यू:


कलाकार     विक्की कौशल , रश्मिका मंदाना , अक्षय खन्ना , आशुतोष राणा , नील भूपलम , विनीत सिंह , डायना पेंटी और दिव्या दत्ता आदि

लेखक   क्ष्मण उतेकर , ऋषि विरमानी , कौस्तुभ सावरकर , उनमान बंकर , इरशाद कामिल और ओंकार महाजन

निर्देशक   क्ष्मण उतेकर

निर्माता.   दिनेश विजन

रिलीज.  14 फरवरी 2025 कर


ऐसा कम ही होता है मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में कि एक ही शुक्रवार को रिलीज हो रही दो बड़ी फिल्मों के प्रेस शोज एक समय पर ही रख दिए जाएं। लेकिन, यहां शायद मामला अहं के टकराव का ज्यादा था। मैडॉक फिल्म्स की फिल्में आमतौर पर जियो स्टूडियोज के साथ ही रिलीज होती रही हैं लेकिन उनकी इस नई फिल्म ‘छावा’ का जियो स्टूडियोज से कोई रिश्ता नहीं है। जियो स्टूडियोज का रिश्ता है उस दूसरी फिल्म ‘कैप्टन अमेरिका:ब्रेव न्यू वर्ल्ड’ से जो बनी तो मार्वल स्टूडियो के बैनर तले है लेकिन जिसे भारत में अब जियो के स्वामित्व में आ चुकी डिज्नी इंडिया ने रिलीज किया है। ऐसे अहं के टकराव सिनेमा में अभी और देखने को मिलेंगे क्योंकि वैलेंटाइंस डे के दिन से डिज्नी प्लस हॉटस्टार और जियो सिनेमा ऐप मिलकर अब जियो हॉटस्टार हो चुका है।Read more


शंभू राजे के जीवनवृत्त पर बनी फिल्म

फिल्म ‘छावा’ को देखने की उत्सुकता किसी दर्शक में क्या हो सकती है, इस पर हर दर्शक की राय अलग अलग हो सकती है। सावधानी यहां ये बरतनी है कि वैलेंटाइंस डे मनाने अब अपनी प्रेमिका या प्रेमी के साथ ये फिल्म देखने न चले जाएं। मैं मुंबई में फन रिपब्लिक स्थित सिनेपोलिस में सुबह नौ बजे का शो देखकर बाहर निकला तो एक युवती गश खाकर बेंच पर बैठी हुई थी और अपने साथी पर भड़की हुई थी कि बिना बताए ऐसी फिल्म दिखाने क्यों ले आया? जी हां बड़ा जिगरा चाहिए इस फिल्म को आखिर तक देखते रहने का। फिल्म को देखने की महाराष्ट्र के लोगों की वजह तो यही है कि ये उनके पूज्य शिवाजी के बेटे संभाजी की कहानी है। शंभू राजे नाम से प्रसिद्ध संभाजी की बायोपिक को देखने का चाव सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में ही है, ऐसा इसकी एडवांस बुकिंग के आंकड़े बताते हैं।Read more




नौ साल की कहानी, शिवाजी सावंत की जुबानी

मराठी में शेर के बच्चे को ‘छावा’ कहते हैं। अगर आपने शिवाजी सावंत के लिखे पौराणिक उपन्यास ‘मृत्युंजय’ और ‘युगंधर’ पढ़े हैं तो आप सचेत होंगे कि उनको तथ्य में अपना कथ्य घोल देने में महारत हासिल है। ऐसे में उनके लिखे ऐतिहासिक उपन्यास ‘छावा’ पर बनी इस फिल्म में कितना कथ्य उनका रहा, कितना फिल्म बनाने वालों ने डिस्क्लेमर के मुताबिक अपनी कल्पना से जोड़ा और कितने इसके तथ्य सही है, ये बताने वाला कोई नहीं है। संभाजी को पूरी फिल्म में बस लड़ते हुए दिखाया गया है। मारने में वह कोई मुरव्वत नहीं करते और लड़ने के लिए भेस भी खूब बदलते दिखे। औरंगजेब दिल्ली से निकला है संभाजी को पकड़ने। संभाजी को रायगढ़ की गद्दी मिली शिवाजी के शिवलोक जाने के बाद। संभाजी और औरंगजेब के नौ साल के जीवन पर ये फिल्म है। 1680 से लेकर 1689 के कालखंड की ये कहानी दुखांत है और दुखांत से ज्यादा वीभत्स है।Read more


क्लाइमेक्स जरूरत से ज्यादा वीभत्स

जी हां, अपने बच्चों और घर की महिलाओं के साथ ये फिल्म देखने से पहले दो बार जरूर सोचें। पूरी फिल्म में मुख्य अभिनेता विक्की कौशल का वीर और रौद्र रूप दिखाने के बाद फिल्म क्लाइमेक्स में आकर कुछ कुछ वैसे ही वीभत्स रस की रचना करती है, जैसे कि फिल्म ‘पैशन ऑफ क्राइस्ट’में ईसा मसीह को सूली पर लटकाकर उन्हें तिल तिल की यातना देने के समय परदे पर रची गई। औरंगजेब को यहां बेइज्जत करने के लिए औरंग के नाम से बार बार बुलाया जाता है। उसके बेटे अकबर को दिखाया जाता है कि वह संभाजी की मदद के लिए बार बार गुहार लगाता है। स्वराज का झंडा ऊंचा करने में वह भी संभाजी का साथ देना चाहता है। बस अपने पिता शहंशाह को कैद में मार देने वाला औरंगजेब उसकी राह का रोड़ा है। बेटी औरंगजेब से भी ज्यादा जालिम है जो कैद में आए संभाजी को तड़पा तड़पा कर मारने का आनंद लेती है।Read more




संभाजी की पत्नी के भाइयों ने की गद्दारी

फिल्म का क्लाइमेक्स दो तीन बातें और बताता जाता है। पहली तो ये कि जीवन उतना ही है जितना हम जीना चाहते हैं और शान से जीना चाहते हैं। किसी के सामने घुटनों के बल गिड़गिड़ाने से अच्छी मौत है। तभी तो औरंगजेब की बेटी कहती है, वह अपनी मौत का जश्न मनाकर चला गया और छोड़ गया हमें अपनी जिंदगी का मातम मनाने को। दूसरी ये कि संभाजी की पत्नी के दोनों भाई गद्दार निकले और सिर्फ ये दोनों भाई ही नहीं, मराठा साम्राज्य के तमाम सूबेदारों ने भी संभाजी के साथ गद्दारी की। तीसरी बात जो बहुत कम लोगों को पता है, वह ये कि शिवाजी ने दूसरी शादी की। और, उनकी ये दूसरी पत्नी सोयराबाई किसी भी तरह संभाजी का खात्मा होते देखना चाहती थी और इसके लिए उन्होंने औरंगजेब तक को चिट्ठी लिख डाली थी।

विक्की कौशल का एक और दमदार अभिनय

फिल्म ‘छावा’ का जिक्र हर उस चर्चा में जरूर होगा जब बात विक्की कौशल के अभिनय की आएगी। विक्की को ऐतिहासिक किरदार करने का जो जुनून है और जिसके लिए वह अपने शरीर को, अपने रंग रूप को पूरी तरह बदल देते हैं, उसका फायदा इस बार निर्देशक लक्ष्मण उतेकर ने उठाया है जिनका नाम फिल्म में लक्ष्मण रामचंद्र उतेकर के रूप में परदे पर आता है। विक्की कौशल ने संभाजी के किरदार में उसी तरह जान फूंकी है जिस तरह वह इसके पहले सरदार उधम सिंह और सैम मानेकशॉ पर बनी बायोपिक में कर चुके हैं। एक और राष्ट्रीय पुरस्कार उनके खाते में इस फिल्म से जमा हो सकता है, लेकिन बस, फिल्म में जो कुछ है वही हैं। और, फिल्म ‘छावा’ उन मुख्य बिंदुओं पर ही बनी हैं, जहां जहां संभाजी को युद्धरत दिखाया गया है। संभाजी जब युद्ध नहीं कर रहे होते हैं तो या तो अपने बचपन की डरावनी यादें सपने में देखते मिलते हैं या फिर अपनी पत्नी येसुबाई के संग श्री और सखी श्री का वार्तालाप करते दिखते हैं। Read more




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